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मानसिक व आध्यात्मिक शांति भारतीय चिंतन में ही संभव – सुरेश सोनी जी

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पटना (विसंकें). राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सह सरकार्यवाह सुरेश सोनी जी ने कहा कि आधुनिक तकनीक ने हमारे जीवन को सुविधापूर्ण बना दिया है, लेकिन यह ध्यान रखना जरूरी है कि मानव जीवन के लिए तकनीक ही सब कुछ नहीं है. वह तो एक साधन मात्र है. तकनीक हमें एक – दूसरे से संपर्क करा सकती है, लेकिन संबंध नहीं बना सकती. यही कारण है कि सोशल मीडिया पर हजारों लोगों से जुड़े रहने के बावजूद व्यक्ति अपने को अकेला महसूस करता है. सह सरकार्यवाह जी विश्व संवाद केंद्र के नवनिर्मित स्टूडियो के उद्घाटन अवसर पर संबोधित कर रहे थे. उन्होंने एप्पल के संस्थापक स्टीव और फेसबुक के संस्थापक मार्क जुकरबर्ग के जीवन से जुड़ी घटनाओं उदाहरण देते हुए कहा कि कोई तकनीक पर कितना भी आधिपत्य जमा ले, लेकिन अगर उसे मानसिक एवं आध्यात्मिक शांति चाहिए तो उसे भारतीय चिंतन में संभावना नजर आने लगती है. संचार माध्यमों का सदुपयोग सही विमर्श को देश – समाज के बीच पहुंचाने के लिए होना चाहिए. पहले के मुकाबले आज की पत्रकारिता में मूल्यों का अवमूल्यन हुआ है. यह चिंता की बात है.

विश्व संवाद केंद्र के सचिव डॉ. संजीव जी ने कहा कि विश्व संवाद केंद्र द्वारा पत्रकारिता एवं संचार के क्षेत्र में विगत दो दशकों से जो प्रयास किये जा रहे हैं, उससे उम्मीद है कि पत्रकारिता की गरिमा को बरकरार रखने में मदद मिलेगी. स्टूडियो बन जाने से ऑडियो विजुअल माध्यम में भी संवाद केंद्र विमर्श सुधार का कार्य करेगा.

संवाद केंद्र के न्यासी विमल जी ने कहा कि सिनेमा, पत्रकारिता, साहित्य से जुड़े बौद्धिक जगत के लोग आज यहां एकत्रित हैं. सब मिलकर एक सार्थक दिशा में पहल करें तो विश्व संवाद केंद्र का प्रयास देशहित में परिणाम दे सकता है.

विश्व संवाद केंद्र के अध्यक्ष श्रीप्रकाश नारायण सिंह जी ने अतिथियों का धन्यवाद किया. विश्व संवाद केंद्र के संपादक संजीव कुमार ने संवाद केंद्र द्वारा चलाये जा रहे कार्यों व स्टूडियों के बारे में विस्तार जानकारी दी.

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