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66वां राष्ट्रीय अधिवेशन – राष्ट्रीय शिक्षा नीति, आत्मनिर्भर भारत, राष्ट्रीय परिदृश्य, भारतीय जीवन पद्धति पर प्रस्ताव पारित

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नागपुर. डॉ. हेडगेवार स्मृति मंदिर में आयोजित अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद का 66वां राष्ट्रीय अधिवेशन अभूतपूर्व रहा. कोरोना जैसी वैश्विक महामारी की छाया में हुए इस अधिवेशन में 1 लाख 02 हजार 072 शिक्षकों और विद्यार्थियों ने प्रत्यक्ष और वर्चुअल माध्यमों से सहभागिता की. ये छात्र देश के 2907 स्थानों के एक लाख से अधिक गांवों, कस्बों तथा महानगरों के रहने वाले थे. अधिवेशन में चार महत्वपूर्ण प्रस्ताव पारित हुए और विद्यार्थियों से जुड़े विभिन्न विषयों पर राष्ट्रव्यापी आंदोलन की रूपरेखा पर भी चर्चा की गई. यह तय किया गया कि कोरोना काल के दौरान शिक्षण संस्थानों में हुई शुल्क वृद्धि को वापस लेने तथा कमजोर वर्गों के लिए न्यायोचित शुल्क माफी, छात्रवृत्ति तथा शोधवृत्ति में आ रही अनियमितताओं को दूर करते हुए समय के अनुसार धनराशि में बढ़ोतरी व समय से लाभान्वितों को जारी करने, उच्च शिक्षण संस्थानों में पारंपरिक माध्यमों से शिक्षा देने के लिए कोविड नियमों का पालन करते हुए छात्रों की चरणबद्ध तरीके से वापसी सुनिश्चित करने के बारे में राष्ट्रव्यापी आंदोलन शुरू किया जाएगा.

अधिवेशन में रखे गए चार प्रस्ताव राष्ट्रीयता का भाव परिलक्षित करती राष्ट्रीय शिक्षा नीति के शीघ्र क्रियान्वयन, मौजूदा राष्ट्रीय परिदृश्य, आत्मनिर्भरता से समृद्धि की ओर अग्रसर होते भारत और कोरोना महामारी से विजय प्राप्त करने में भारत की विशिष्ट संस्कृति व जीवन पद्धति की भूमिका से जुड़े हुए थे.

प्रथम प्रस्ताव – राष्ट्रीयता का भाव परिलक्षित करती राष्ट्रीय शिक्षा नीति का हो शीघ्र क्रियान्वयन

राष्ट्रीय अधिवेशन में पारित पहले प्रस्ताव के अंतर्गत केन्द्र सरकार द्वारा भारतीय विचार केन्द्रित तथा वर्तमान समय की मांग के अनुरूप राष्ट्रीय शिक्षा नीति बनाने के लिए नीति-नियंताओं का अभिनंदन किया गया और इस नीति के शीघ्र पूर्ण क्रियान्वयन की मांग की गई. साथ ही इस प्रस्ताव के अंतर्गत विभिन्न पिछड़े तथा कमजोर वर्गों के लिए शिक्षा क्षेत्र में विशेष छूट, भारत केन्द्रित पाठ्यक्रमों के निर्माण, शोध के लिए बजट बढ़ाने तथा शिक्षा क्षेत्र के लिए 6 प्रतिशत बजट आवंटन, शिक्षकों के प्रशिक्षण, आय तथा प्रोन्नति पर ध्यान तथा सभी वर्गों के लिए सुलभ शिक्षा व्यवस्था आदि सुनिश्चित करने की मांग की गई है.

प्रस्ताव के मुख्य बिन्दु

– भारत केंद्रित शिक्षा ही हमें एक समृद्ध, शक्तिशाली, ज्ञान केंद्रित समाज के रूप में प्रतिष्ठित कर सकती है. देश के जनमानस की इच्छाओं, अपेक्षाओं और स्वप्नों को धरातल पर उतारने की क्षमता रखने वाली राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 का अभाविप का यह 66वां राष्ट्रीय अधिवेशन स्वागत करता है.

– भारतीय भाषाओं (स्थानीय भाषा) में शिक्षा लेने की स्वतंत्रता, भारतीय ज्ञान, कला, विधा, साहित्य के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए संकल्पित यह राष्ट्रीय शिक्षा नीति भारत को विश्वगुरु बनाने में एक सशक्त प्रयास है.

– राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 का क्रियान्वयन भी उसकी मूलभूत भावना के अनुरूप ही होना चाहिए.

– सामाजिक तथा आर्थिक रूप से पिछड़े, दिव्यांग एवं ट्रांसजेंडर विद्यार्थियों तथा छात्राओं की शिक्षा के लिए प्रस्तावित छात्रावास, छात्रवृत्ति तथा अन्य सुविधओं को शीघ्र ही उपलब्ध कराया जाए.

– विद्यार्थीपरक, रुचि के अनुरूप विषय चुनने तथा परिस्थिति के अनुरूप पाठ्यक्रम को पूर्ण करने की स्वतंत्रता मिले.

– शैक्षिणोत्तर गतिविधि यथा-योग, खेल कूद, कला आदि को मूल पाठ्यक्रम का हिस्सा बनाना तथा अकादमिक मूल्यांकन कोष जैसी महत्वपूर्ण योजनाओं को शीघ्र ही लागू किया जाए.

– राष्ट्रीय शिक्षा नीति की मूलभूत भावना के अनुरूप भारत केंद्रित पाठ्यक्रमों के निर्माण को प्राथमिकता दी जाए.

– राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुसार शिक्षा जगत को और अधिक सशक्त बनाने के लिए प्रयासरत स्वयंसेवी व्यक्तियों तथा संस्थाओं का सहयोग लेने तथा अपनी कार्यक्षमताओं के अनुरूप अपनी शैक्षणिक संस्था का संवर्धन करने की स्वतंत्रता केंद्र एवं राज्य सरकारें शीघ्र ही प्रदान करें.

– शोध की दशा और दिशा सुधारने के लिए राष्ट्रीय शोध प्रतिष्ठान का गठन किया जाए एवं वर्तमान में शोध पर होने वाले व्यय सकल घरेलू उत्पाद के कुल 0.67 प्रतिशत की धनराशि को बढ़ाया जाए.

– केंद्र तथा राज्य सरकारें राष्ट्रीय शिक्षा नीति में प्रस्तावित सकल घरेलू उत्पाद का 6 प्रतिशत शिक्षा के लिए उपलब्ध कराएं.

– राष्ट्रीय शिक्षा नीति में परिलक्षित सस्ती एवं सुलभ शिक्षा हर विद्यार्थी को मिले, इसे ध्यान में रखते हुए शुल्क निर्धारण आदि के विषयों पर तुरंत कार्य किया जाए.

– राष्ट्रीय शिक्षा नीति के यथाशीघ्र क्रियान्वयन के लिए कार्यसमूह का गठन कर समयबद्ध रूपरेखा जारी करें.

द्वितीय प्रस्ताव- राष्ट्रीय परिदृश्य

राष्ट्रीय अधिवेशन में पारित दूसरे प्रस्ताव में भारतीय व्यवस्था के भीतर आए विभिन्न सकारात्मक परिवर्तनों जैसे राम मंदिर निर्माण शुरू होने, नागरिकता संशोधन कानून, विभिन्न मोर्चों पर शत्रुओं की सेना पर भारतीय सेना के भारी पड़ने तथा जलवायु संरक्षण के मोर्चे पर तय लक्ष्य से अधिक सफलता प्राप्त करने की दिशा में आगे बढ़ने के लिए भारत सरकार के प्रयासों तथा उपलब्धियों का स्वागत किया गया है. इसके साथ ही देश की आंतरिक सुरक्षा के लिए लगातार चुनौती बनने के प्रयास में जुटी अलगाववादी तथा विभाजनकारी ताकतों की निंदा की गई है.

प्रस्ताव के मुख्य बिन्दु

– भारत आज अपने प्राचीन अस्तित्व, विचार और व्यवहार के कारण पुनः विश्व में अपनी वास्तविक पहचान बनाने में सफल हुआ है.

– भारत आज अपनी आंतरिक चुनौतियों का सामना दृढ़ता पूर्वक कर रहा है.

– अनुच्छेद 370 को हटाने के ऐतिहासिक निर्णय के बाद जम्मू कश्मीर में हुए हाल ही के चुनावों में जनता की सहभागिता इस निर्णय की सशक्त और लोकतांत्रिक स्वीकृति है.

– कोरोना तालाबंदी के समय संपूर्ण भारतीय समाज जैसे सेवाभारती, गुरुद्वारा, सामाजिक-धार्मिक संस्थान तथा अन्य सेवाभावी संगठनों द्वारा किया गया सेवाकार्य अभिनंदनीय है. इससे यह स्पष्ट होता है कि भारतीय तंत्र समाज केंद्रित है, न कि सरकार केंद्रित.

– कुछ विभाजनकारियों द्वारा भारत की आंतरिक शांति को भंग करने का प्रयास किया जा रहा है.

– पांथिक मानसिकता से ग्रसित लोगों द्वारा समाज में विद्वेष का वातावरण कर खड़ा करते हुए दिल्ली में दंगे भड़काना एवं सरकार के दबाव में छत्तीसगढ़ पुलिस द्वारा दमन चक्र अपनाते हुए बलात्कारियों को संरक्षण देना, पश्चिम बंगाल में सरकार के समर्थन से दिन प्रतिदिन राजनीतिक हिंसा भड़काना, बेंगलुरू जैसे महानगरों के पुलिस थाने में हमला व बलात्कार जैसे घटनाक्रम पर निंदित राजनीति करना तथा कुछ राज्यों की सरकारों द्वारा जैसे – महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल तथा केरल में भारतीय लोकतंत्र के चौथे स्तंभ मीडिया की आवाज को दबाने एवं दमनकारी सोच रखने वाले वामपंथी संगठन द्वारा कर्नाटक में एप्पल कंपनी के कर्मचारियों को भड़का कर तोड़- फोड़ किए जाने की राष्ट्रीय अधिवेशन निंदा करता है.

– अभाविप केंद्र सरकार द्वारा कृषि क्षेत्र में सुधार के लिए पारित तीनों कानूनों का समर्थन करते हुए देश के सीमित क्षेत्रों में चल रहे किसान आन्दोलन की आड़ में देश विरोधी ताकतों द्वारा की जा रही नापाक हरकतों व अराजकता पर अविलम्ब विराम लगा कर किसानों के भ्रम को दूर करने की अपील करता है.

– केंद्र सरकार द्वारा सेना में महिला के स्थायी कमिशन की घोषणा का स्वागत करता है.

– महिला विरोधी व जिहादी मानसिकता के लोगों द्वारा महिलाओं पर अत्याचार बढ़ते हुए दिखाई दे रहे हैं. राष्ट्रीय अधिवेशन क्रूर मानसिकता के विरुद्ध उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश सरकार की भांति केंद्र सरकार के द्वारा भी कड़े कानून बनाने की मांग करता है.

– सिनेमा जगत के एक वर्ग का मादक पदार्थों के सेवन, उसे न्यायोचित ठहराना और फिल्मों इत्यादि के माध्यम से प्रचारित- प्रसारित करना चिंता का विषय है. केंद्र सरकार स्पष्टता पूर्वक और दृढ़ता के साथ इसके समूल नाश के लिए कार्यवाही करे.

– सही पहचान के साथ तथा सत्य जानकारी देते हुए जनगणना में सक्रियता से सहभागिता करें और भ्रम उत्पन्न करने वाले षड्यंत्रकारियों से सावधान रहें.

तृतीय प्रस्ताव – आत्मनिर्भरता से समृद्धि की ओर अग्रसर भारत

अधिवेशन में पारित तीसरे प्रस्ताव में अभाविप ने स्वास्थ्य क्षेत्र में आधारभूत संरचना निर्माण, लघु एवं सूक्ष्म उद्यमों को लेकर चल रहे सकारात्मक प्रयासों के प्रति संतोष व्यक्त करते हुए केन्द्र तथा राज्य सरकारों से कृषि, वन, लघु एवं कुटीर उद्योगों का स्थानीयकरण करने की मांग उठाई है.

प्रस्ताव के मुख्य बिन्दु

– आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ता भारत शैक्षिक, आर्थिक, स्वास्थ्य एवं विज्ञान आदि क्षेत्रों में नई ऊंचाइयां छूने को उद्यत है.

– कोरोना काल की विषम परिस्थिति में भारत ने अमेरिका, रूस, जर्मनी, ब्रिटेन, संयुक्त अरब अमीरात, मलेशिया आदि देशों की मदद करते हुए पुनः अपने ‘वसुधैव कुटुंबकम के विचार को चरितार्थ किया है.

– पिछले कई वर्षों में भारत में स्वदेशी तकनीक का उपयोग अंतरिक्ष और रक्षा उपकरणों का उत्पादन लगातार बढ़ा है.

– कल तक हम खिलौनों एवं त्यौहारों की सामग्री के लिए दूसरे देशों पर निर्भर थे, आज इनका उत्पादन पर्याप्त रूप में भारत में ही हो रहा है.

– भारत सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योगों में दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा देश है जो 6000 से अधिक उत्पादों का उत्पादन करता है. इसका सकल घरेलू उत्पाद में 6.11 प्रतिशत का योगदान है. इन उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए भारत सरकार ने आत्मनिर्भर पैकेज के तहत 5,94,550 करोड़ रूपए दिए गए हैं. इससे देश के युवाओं के लिये रोजगार के नये अवसर पैदा हो रहे हैं.

– कृषि में धान और गेहूँ के साथ-साथ हमारी आवश्यकता के अनुरूप अन्य फसलों के समुचित समन्वय पद्धति को प्रोत्साहन देना एवं प्रसंस्करण ईकाई स्थापित कर उत्पादों का मूल्य संवर्धन करना जिससे वोकल फॉर लोकल संकल्पना के माध्यम से किसानों की आय को बढ़ाया जा सके.

– केंद्र एवं राज्य की सरकारों को कृषि, वन, लघु एवं कुटीर उद्योगों का स्थानीयकरण करना चाहिए, जिससे शहरी क्षेत्रों पर निर्भरता को कम कर श्रमिकों के पलायन को रोका जा सके.

चतुर्थ प्रस्ताव – विशिष्ट संस्कृति व जीवन पद्धति द्वारा कोरोना महामारी से विजय पाता भारत

अधिवेशन में पारित चतुर्थ प्रस्ताव में केन्द्रीय तथा राज्य सरकारों द्वारा कोरोना वायरस से निपटने के महनीय प्रयासों की सराहना करते हुए चिकित्सकों, मीडिया कर्मियों, पुलिस कर्मियों तथा सफाई कर्मचारियों जैसे फ्रंटलाइन वर्कर्स को साधुवाद दिया गया है. अभाविप ने प्रस्ताव के माध्यम से भारतीय जीवनशैली के प्रचार प्रसार और अनुकरण की आवश्यकता की ओर ध्यान केंद्रित कर नई व्यवस्थाओं के निर्माण पर बल दिया.

प्रस्ताव के मुख्य बिन्दु

– कोरोना काल में भारत के प्राचीन ज्ञान-परंपराओं और जीवन मूल्य की वैश्विक स्वीकार्यता और प्रसिद्धि में विस्तार हुआ है.

– इस कालखंड में भारतीय समाज द्वारा जिस प्रकार के अनुशासन, सामूहिकता, उदारता, सहानुभूति, वैश्विक बंधुत्व, निस्वार्थ सेवा की गई, यह उल्लेखनीय है.

– राष्ट्रीय अधिवेशन भारत सरकार द्वारा इस चुनौती व वैश्विक आपदा के दौरान लोक हितकारी योजनाओं के त्वरित क्रियान्वयन तथा इस आपदा को अवसर में परिवर्तन करने के लिए ‘आत्मनिर्भर भारत अभियान’ के अंतर्गत किए जा रहे सुधारों की सराहना करता है.

– इस विकट समस्या के दौरान अभाविप के कार्यकर्ताओं द्वारा सेवा गतिविधि, प्रशासनिक व्यवस्था के सुचारू संचालन, कोरोना से संबंधित जांच इत्यादि में स्वयंसेवी के रूप में कार्य, परिषद की पाठशाला अभियान द्वारा आर्थिक व सामाजिक रूप से पिछड़े वर्गों के मध्य शिक्षा अभियान जैसे अनेकानेक कार्यक्रम के माध्यम से जिस प्रकार की भूमिका का निर्वहन किया गया है, वह सराहनीय एवं गौरवान्वित करने वाला है.

– इस आपदा के दौरान तालाबंदी के समय से लेकर अब तक भारतीय समाज द्वारा जिस प्रकार की एकता, समरसता, अनुशासन, सहयोग व सहकार की भावना से जनसेवा व आर्थिक संसाधनों को सबके लिए सुलभ कराए, वह प्रशंसनीय है.

– इस समय लोगों ने सरकारी आदेशों का अनुपालन किया, वह एक आदर्श उदाहरण है.

– इस कालखंड में भारत के युवाओं द्वारा नवाचार को आत्मसात करते हुए तत्कालीन आवश्यकताओं के अनुसार एप के निर्माण से लेकर कोरोना की लड़ाई के विरुद्ध पी.पी.ई. किट इत्यादि संसाधनों के उत्पादन के उपाय किये, वह प्रोत्साहित करने वाला है.

– इस वैश्विक महामारी के दौरान अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारतीय जीवन पद्धति, चिकित्सा पद्धति व आचार- विचार के नियमों को विश्व में अपनाया जाना, भारत की शाश्वत संस्कृति की उत्कृष्टता का एक सजीव उदाहरण है.

– मानव- प्रकृति संबंध, वैश्विक कल्याण की भावना, योग इत्यादि के संबंध में भारतीय विचारों की वैश्विक स्तर पर स्वीकार्यता बढ़ी है.

– भारतीय अभिवादन नमस्ते और आयुर्वेदिक औषधियों का प्रचलन बढ़ा है, यह भारतीय जीवनशैली की सार्थकता को दर्शाता है.

– वैश्विक आपदा से विजय प्राप्त करने में वैक्सीन के उत्पादन व उसके सुचारू वितरण के साथ-साथ भारतीय जीवनशैली के भी उचित प्रसारण व अनुकरण की आवश्यकता है.

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