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ये अनंतानुभव नहीं, अमृतानुभव – भय्याजी जोशी

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डॉ. अनंत कुलकर्णी के अनुभवों पर आधारित पुस्तक का प्रकाशन

मुंबई (विसंकें). राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरकार्यवाह भय्याजी जोशी ने कहा कि किसी व्यक्ति को समाज की समस्याएं ध्यान में आती हैं, आवश्यकताओं का ज्ञान होता है, कमियां जान लेता है और उनसे बोध लेकर जब कृति की जाती है, तब ही उसका परिणाम दिखता है. सामाजिक प्रश्नों का आकलन हमें जब तक महसूस नहीं होते, तब तक अच्छा कार्य खड़ा नहीं होता. डॉ. अनंत कुलकर्णी जैसा व्यक्ति जब सामाजिक कार्य करता है, तब वह अपना मार्ग स्वयं तैयार करता है. इनके 35 वर्षों के वैद्यकीय कार्य का संकलन अनंतानुभव यह वास्तव में अमृतानुभव है. वाचकों को, इस क्षेत्र में आने की इच्छा रखने वाले हर किसी को यह पुस्तक नित्य प्रेरणा देगी.

पिछले कई वर्षों से सामाजिक क्षेत्र में वैद्यकीय सेवा प्रदान करने वाले डॉ. अनंत कुलकर्णी के अनुभवों का संकलन ‘अनंता’नुभव पुस्तक का विमोचन भय्याजी जोशी के करकमलों से संपन्न हुआ. मंच पर डॉ. अनंत कुलकर्णी, पुस्तक के लेखक-ज्येष्ठ पत्रकार सुधीर जोगलेकर, स्नेहल प्रकाशन के रवींद्र घाटपांडे, गीता कुलकर्णी आदि उपस्थित थे. विश्व संवाद केंद्र मुंबई एवं स्नेहल प्रकाशन के संयुक्त तत्त्वाधान में कार्यक्रम का आयोजन किया गया.

भय्याजी जोशी ने कहा, भारत के सब से प्रभावी सेवा कार्यों में से एक है आरोग्यरक्षक योजना. इस योजना का प्रारंभ डॉ. कुलकर्णी द्वारा उनके ही कार्यक्षेत्र जव्हार-मोखाडा में हुआ है. जनकल्याण समिति द्वारा देशभर में ब्लड बैंक की चेन खड़ी करने का महत्त्वपूर्ण कार्य उन्होंने किया है. परिश्रम, चिंतन, नए आयामों का विचार करके उन्होंने इस सामाजिक कार्य का विस्तार किया है. दूसरे लोगों की वेदनाओं को देखने की दृष्टी हो तो ही ऐसा कार्य खड़ा हो सकता है.

डॉ. अनंत कुलकर्णी के अनुभवों को पुस्तक का रूप देने वाले, लेखक सुधीर जोगलेकर ने कहा, अनेक जगहों पर वैद्यकीय सेवाओं की आड़ में धर्म परिवर्तन करने वाले क्रिश्चियन मिशनरी की संख्या बहुत बड़ी है. विदेश से मिलने वाले पैसे का उपयोग करके, वैद्यकीय सेवाओं के नाम पर धर्म परिवर्तन किया गया. ऐसी स्थिति में भी किसी प्रलोभन के पीछे न भागते हुए, पहले निशुल्क और बाद में अत्यल्प पैसे लेकर पैतीस साल अनंत कुलकर्णी ने समाजसेवा शुरू रखी. संघ के माध्यम से दाई प्रशिक्षण, आरोग्यरक्षक प्रशिक्षण ऐसे अभिनव प्रकल्प उन्होंने शुरू किये. इस पुस्तक से प्रेरित होकर अनेक युवा वैद्यकीय क्षेत्र में आएंगे, और सामाजिक कार्यकर्ता तैयार होंगे.

पुस्तक के प्रकाशक रवींद्र घाटपांडे ने कहा, ऐसे अनुभव अगली पीढ़ी तक पहुंचना आवश्यक है. इनसे ही अन्य कार्यकर्ताओं को दिशा मिलती है. अनंतानुभव ऐसे ही प्रेरित करने वाली पुस्तक सिद्ध होगी.

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