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OTT प्लेटफॉर्म के कंटेंट की निगरानी स्वदेशी अभिकरण के माध्यम से हो

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चंडीगढ़. भारतीय चित्र साधना और पंचनद शोध संस्थान द्वारा “ओटीटी और डिजिटल कंटेंट का विनियमन” विषय पर एक वेबिनार का आयोजन किया गया. मुख्य वक्ता वरिष्ठ मीडियाकर्मी और रिलायंस कम्युनिकेशन के अध्यक्ष व निदेशक उमेश उपाध्याय ने कहा कि “आज के समय में यह आवश्यक हो गया है कि देश के अंदर ओटीटी, डिजिटल और सोशल मीडिया में ज्यादातर बाहरी कंपनियों के नियन्त्रण में जो कंटेंट चल रहा है, उसका  नियमन स्वदेशी तंत्र के अधीन हो. अभी तक यह विदेशी कम्पनियों द्वारा संचालित होता है जो भारतीय नियम क़ानून से नियंत्रित नहीं होतीं…”

उन्होंने कहा कि “हमारे देश में किस तरह की सामग्री को आगे बढ़ाना है, इसकी ठोस जवाबदेही न होने के कारण न केवल हमारे सांस्कृतिक मूल्यों, बल्कि राजनीतिक विमर्श को भी मनमाने तरीके से चलाया जाता है. स्वदेशी कंपनियों की तरह विदेशी कम्पनियों पर सरकार अथवा भारतीय क़ानून का नियंत्रण नहीं होता, जिस कारण यहां का स्थानीय डेटा भी विदेशों में चला जाता है. इसलिए अब समय आ गया है कि हम ऐसे क़ानून बनाएं ताकि हमारा स्वदेशी डेटा बाहर न जाने पाए क्योंकि पूरा विश्व भी अपने डेटा की सुरक्षा के प्रबंध कर चुका है.”

विशिष्ट अतिथि इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र के सदस्य सचिव डॉ. सच्चिदानंद जोशी ने कहा कि “ऐसे प्रयास किए जाने चाहिए कि भारतीय विमर्श और जीवन मूल्यों से जुड़ा कंटेंट तैयार किया जाए. हम कंटेंट के इस युद्ध को बखूबी लड़ सकते हैं, बशर्ते हम रचनात्मक और गुणवत्तापूर्ण कंटेंट तैयार करें जो स्वयं हमारे सांस्कृतिक मूल्यों की अभिव्यक्ति करे. ऐसा कंटेंट बनाकर हम सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर विदेशी कंपनियों द्वारा संचालित व अग्रसारित नकारात्मक सामग्री को प्रभावी चुनौती दे सकते हैं.”

भारतीय चित्र साधना के चेयरमैन और पंचनद शोध संस्थान के निदेशक प्रो. बृजकिशोर कुठियाला ने वेबिनार की अध्यक्षता करते हुए कहा कि आज आवश्यकता इस बात की है कि हम विभिन्न विषयों पर लोकप्रिय विमर्श प्रस्तुत करें. विदेशी मीडिया समूह द्वारा निर्देशित नकारात्मक और सतही कंटेंट को पराजित करने के लिए यह आवश्यक है कि हम भारतीय अस्मिता और स्वाभिमान से जुड़ी सामग्री को तथ्यपूर्ण वैज्ञानिक ढंग से और रोचकता के साथ प्रस्तुत करें.

वेबिनार में भारतीय चित्र साधना, पंचनद शोध संस्थान, विभिन्न विश्वविद्यालयों, मीडिया संस्थानों और संवाद केन्द्रों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया. नेटफ्लिक्स पर लघु फिल्मों और वेब सीरीज के बहाने भारतीय संस्कृति, हमारे प्रतीकों को निशाना बनाया जा रहा है, ऐसे में स्वदेशी नियामक की आवश्यकता पर केन्द्रित यह वेबिनार सार्थक एवं प्रासंगिक कहा जाएगा.

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