1984 के दोषियों पर कार्यवाही का निर्णय

1984 के दोषियों पर कार्यवाही का निर्णय

नई दिल्ली. 1984 के कत्लेआम तथा घावों पर मलहम लगाने के लिये मौजूदा सरकार से अपेक्षा में राष्ट्रीय सिख संगत का एक शिष्टमण्डल माननीय श्री राजनाथ सिंह जी, गृह मंत्री,…

ग्लोबल इमाम काउन्सिल ने मुशर्रफ के बयान को बताया असहनीय

ग्लोबल इमाम काउन्सिल ने मुशर्रफ के बयान को बताया असहनीय

नई दिल्ली. ग्लोबल इमाम काउन्सिल ने भारत के विरुद्ध करगिल युद्ध रचने वाले पाकिस्तान के पूर्व सैन्य शासक परवेज मुशर्रफ के कश्मीर पर बेहद भड़काऊ बयान को भारत विरोधी और…

एकात्मता का प्रतीक है संघ का सेवाकार्य: भय्या जी जोशी

एकात्मता का प्रतीक है संघ का सेवाकार्य: भय्या जी जोशी

लखनऊ. राहत कार्य संघ की कार्यपद्धति में ही शामिल है. जम्मू-कश्मीर में संघ द्वारा की गयी आपदा सहायता वस्तुतः एकात्मता की मिसाल है. समाज के दलित, पिछड़े वनवासी क्षेत्र में…

संघ धर्म के आधार पर किसी से भेदभाव नहीं करता: मनमोहनजी वैद्य

संघ धर्म के आधार पर किसी से भेदभाव नहीं करता: मनमोहनजी वैद्य

लखनऊ में अ.भा.कार्यकारिणी मण्डल की बैठक शुरू लखनऊ. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय कार्यकारिणी मण्डल की तीन दिवसीय वार्षिक बैठक शुक्रवार, 17 अक्टूबर को यहां शुरू हुई. संघ के…

साहित्य में भाव को लेकर अर्थ निकलता है: प्रो. चांद

साहित्य में भाव को लेकर अर्थ निकलता है: प्रो. चांद

देहरादून (विसंके). संस्कृत भारती देहरादून द्वारा विश्व संवाद केन्द्र धर्मपुर के विवेकानन्द सभागार में 12 अक्टूबर को एक दिवसीय संस्कृत शिक्षक प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन किया गया. जिसमें मुख्य अतिथि…

‘कारसेवकों का बलिदान नहीं होगा बेकार’

‘कारसेवकों का बलिदान नहीं होगा बेकार’

हरिद्वार(विसंके). श्रीप्रेमनगर आश्रम हरिद्वार में चल रहे बजरंग दल के राष्ट्रीय अधिवेशन में राम मंदिर कारसेवा में मारे गये कोठारी बंधुओं की माता और अमरनाथ श्राइन बोर्ड संघर्ष में शहीद…

प्रधानमंत्री द्वारा ”विराट पुरुष नानाजी” ग्रंथावली का विमोचन

प्रधानमंत्री द्वारा ”विराट पुरुष नानाजी” ग्रंथावली का विमोचन

नई दिल्ली. प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी ने शनिवार, 11 अक्टूबर को यहां विराट पुरूष नाना जी देशमुख नामक ग्रंथावली का विमोचन किया. यह ग्रंथ दीनदयाल अनुसंधान संस्‍थान द्वारा छह अंकों…

परिपूर्ण मानव – श्री गुरुजी

भारतीय जीवन-सिद्धांतों के संबंध में आज फिर से विचार करने की आवश्यकता उत्पन्न हुई है. इसका कारण बड़ा स्पष्ट और सरल है. हमें पता है कि जब तक देश में एक परकीय राज्य था, तब लोगों में अपना देश, अपना राष्ट्र, अपना स्वत्व-यह विचार प्रबल था. लोग यह भी समझते थे कि अपने राष्ट्र के स्वातंत्र्य के लिये, पुनर्निर्माण के ल more ...

October 18, 2014 (0) comments

31 अक्तूबर/जन्म-दिवस : लौहपुरुष सरदार पटेल

 15 अगस्त, 1947 को अंग्रेजों ने भारत को स्वाधीन तो कर दिया; पर जाते हुए वे गृहयुद्ध एवं अव्यवस्था के बीज भी बो गये. उन्होंने भारत के 600 से भी अधिक रजवाड़ों को भारत में मिलने या न मिलने की स्वतन्त्रता दे दी. अधिकांश रजवाड़े तो भारत में स्वेच्छा से मिल गये; पर कुछ आँख दिखाने लगे. ऐसे में जिसने इनका दिमाग सीधाक more ...

October 31, 2014 (0) comments
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