समाज में सभी में सेवा धर्म होना आवश्यक है – डॉ. मोहन भागवत जी

समाज में सभी में सेवा धर्म होना आवश्यक है – डॉ. मोहन भागवत जी

बीड़ (विसंकें). राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी ने कहा कि किसान सुरक्षित रहें, समाज में ऐसा वातावरण तैयार करें. किसान आत्महत्या किस कारण करता है, वह…

जल व्यवस्थापन क्षेत्र में लातूर वासियों का कार्य पूरे देश में दिशादर्शक बनेगा – डॉ. मोहन भागवत जी

जल व्यवस्थापन क्षेत्र में लातूर वासियों का कार्य पूरे देश में दिशादर्शक बनेगा – डॉ. मोहन भागवत जी

लातूर (विसंकें). राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी ने कहा कि प्राकृतिक आपदा में हाथ पार हाथ धरे न बैठकर पूरे धैर्य एवं साहस के साथ जनभागीदारी…

अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में भी मिले एससी, एसटी और ओबीसी को आरक्षण – डॉ. कृष्ण गोपाल जी

अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में भी मिले एससी, एसटी और ओबीसी को आरक्षण – डॉ. कृष्ण गोपाल जी

नई दिल्ली. सच फाउंडेशन द्वारा दिल्ली विश्वविद्यालय के पटेल चेस्ट सभागार में “राष्ट्रीय आरक्षण नीति और अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय” विषय पर संगोष्ठी आयोजित की गई. 18 जून को आयोजित संगोष्ठी…

संघ का स्वयंसेवक बिना किसी प्रलोभन व भय के कार्य करता है – डॉ. बजरंग लाल गुप्त जी

संघ का स्वयंसेवक बिना किसी प्रलोभन व भय के कार्य करता है – डॉ. बजरंग लाल गुप्त जी

रोहतक (विसंकें). राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के उत्तर क्षेत्र संघचालक डॉ. बजरंग लाल गुप्त जी ने कहा कि संघ पिछले 91 वर्षों से समाज में कार्य कर रहा है. संघ का…

उपभोग शून्य स्वामी ही शासन करने योग्य है – डॉ. मोहन भागवत जी

उपभोग शून्य स्वामी ही शासन करने योग्य है – डॉ. मोहन भागवत जी

जोधपुर (विसंकें). राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी ने कहा कि दूरदर्शी एवं डायनमिक व्यक्तित्व के स्वामी छत्रपति शिवाजी महाराज श्रीमंत योगी थे. हिन्दू जीवन मूल्यों को आत्मसात…

मर्यादा, विज्ञान और पुरातन ज्ञान, परंपरा का समन्वय बने विकास का आधार – डॉ. मोहन भागवत जी

मर्यादा, विज्ञान और पुरातन ज्ञान, परंपरा का समन्वय बने विकास का आधार – डॉ. मोहन भागवत जी

नई दिल्ली. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी ने कहा कि भारत के पुरातन ज्ञान और परंपरा को नकार कर किया गया विकास न तो पूरी तरह…

अभिनवगुप्त का दार्शनिक चिंतन दसवीं शताब्दी के समान आज भी प्रासंगिक है – दत्तात्रेय होसबले जी

अभिनवगुप्त का दार्शनिक चिंतन दसवीं शताब्दी के समान आज भी प्रासंगिक है – दत्तात्रेय होसबले जी

धमकियों के बावजूद कश्मीर में निकली अभिनव संदेश यात्रा श्रीनगर. आचार्य अभिनवगुप्त सहस्राब्दी समारोह समिति द्वारा कश्मीर शैव दर्शन के आध्याता आचार्य अभिनवगुप्त के संदेश को देशभर में पहुंचाने के…

हम तो समाज को ही भगवान मानते हैं – श्रीगुरूजी

अनेकों बार कई कार्यकर्ताओं ने श्रीगुरुजी से वर्ण तथा जातिव्यवस्था के बारे में प्रश्न पूछे हैं. इन प्रश्नों के उत्तर में श्रीगुरुजी का वर्ण तथा जातिव्यवस्था के बारे में दृष्टिकोण बिल्कुल साफ हो जाता है. कुछ प्रश्न और श्रीगुरुजी द्वारा दिए गए उनके उत्तर इस प्रकार हैं - प्रश्न - यह हिंदू राष्ट्र है. इस सिद्धांत more ...

May 19, 2016 (0) comments

28 जून / जन्मदिवस – अपना सर्वस्व दान करने वाला अनुपम दानी भामाशाह

नई दिल्ली. दान की चर्चा होते ही भामाशाह का चरित्र स्वयं ही आंखों के सामने आ जाता है. देश के लिए सर्वस्व न्यौछावर कर देने वाला दूसरे उदाहरण कम ही मिलेंगे. देश रक्षा के लिए महाराणा प्रताप के चरणों में अपनी सब जमा पूंजी अर्पित करने वाले दानवीर भामाशाह का जन्म अलवर (राजस्थान) में 28 जून, 1547 को हुआ था. उनके पिता more ...

June 28, 2016 (0) comments
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